Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
मिथः शिलापुत्रकयोर्यथैकोपलपुत्रयोः ।
श्लिष्टयोरपि नो रागस्तथा चित्तशरीरयोः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जब केवल विशुद्ध चित् ही है, तब उससे भिन्न आत्मा” यह दूसरा नाम कैसे हुआ ? इस पर
कहते हैं ।
सर्वत्र व्यापक चैतन्य का "आत्मा" यह नाम केवल व्यवहार के लिए ही कल्पित है, नाम, रूप आदि
भेद तो इस चैतन्य से अत्यन्त दूर ही है