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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 63

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 63

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जिस महामूर्ख को इस प्रकार भ्रम हो कि शरीर के नष्ट होने पर मैं नष्ट हो गया, तो उस मूर्ख के लिए मैं यों मानता हूँ कि माता के स्तन से उसके लिए वेताल का समुत्थान हो गया है