Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 65
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 65
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
“भे नष्ट हो गया, मैं मर गया” यों लोगों द्वारा विनाशित्व आदि से विशिष्ट जो जीव
कहा जाता है, उसे निश्चितरूप से मेँ मिथ्या ओर असत् मानता हूँ, क्योकि देश ओर काल से व्यवहित
होकर यानी पूर्व शरीर-त्यागने के बाद विभिन्न -विभिन्न देश ओर काल में जाकर वह अन्य देह को ग्रहण
करके पुनःपुनः अनुभूत होता है