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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 66

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 66

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इस संसार में मरण नाम की नदियों में, तरंगों के भीतर तृण के सदृश, प्रतीत होने वाले जीवों के द्वारा देश और कालवश तिरोहित स्वरूपो से उक्त प्रकार के भावों की “मर गया, नष्ट हो गया उत्पन्न हुआ” आदि पदार्थो की भ्रान्तिवश से कल्पना की जाती है