Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 73, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
परोऽणुः सकलातीतरूपोऽहं चेत्यहंकृतिः ।
प्रथमा सर्वमेवाहमित्यन्योक्ता रघूद्वह ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हे मनुष्यो, तुम लोग पाँच भूतो का क्षोभ, नाश ओर
उत्पत्ति होने पर हर्ष, अमर्ष ओर विषाद के वश में क्यों हो जाते हो