Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

निरञ्जनतया बुद्धो जनतां पालयंश्चिरम् । जीवन्मुक्ताकृतिर्नित्यं मनू राज्यमपालयत् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे मरुभूमि में सूर्य किरणों के ताप से जल प्रतीत हो जाता है, वैसे ही उक्त स्वरूपवाली इस रागादि की शक्ति स्वरूपा महामाया से, जो प्रवृत्ति, भोग, पुण्य, पाप, वासना अनर्थ परम्परारूप विकारों से युक्त है तथा जिसने परमात्मा के अन्यथा भाव से अपना अस्तित्व बना रक्खा है यह समस्त जगत्‌ प्रतीत हो रहा है