Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
विचित्रबलयुद्धेषु व्यवहारेषु भूरिषु ।
मान्धाता सुचिरं तिष्ठन्प्राप्तवान्वै परं पदम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
मन, बुद्धि, अहंकार, वासना ओर इन्द्रिय इस प्रकार के नाम ओर रूप की कल्पना करनेवाले
स्वस्वरूपरूपी जलों से आत्मारूप समुद्र प्रस्फुरित होता हे