Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
बलिः पातालपीठस्थः कुर्वन्सदिव संस्थितिम् ।
सदा त्यागी सदाऽसक्तो जीवन्मुक्त इति स्थितः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अवस्थित है, ऐसा कहते है ।
हे श्रीरामजी, चित्त ओर अहंकार यों दो प्रकार का व्यवहार केवल वाणी मेँ ही है, वास्तव में नहीं है,
क्योंकि जो चित्त है, वही अहंकार है और जो अहंकार है, वही चित्त है