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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

नमुचिर्दानवाधीशो देवद्वन्द्वपरः सदा । नानाचारविचारेषु क्वचिन्नान्तरतप्यत ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे बर्फ से भिन्न शुक्लत्व की कल्पना की जाती है, पर वास्तव में बर्फ और शुक्लत्व में परस्पर कोई पार्थक्य नहीं हे, वैसे ही चित्त और अहंकार की कल्पना व्यर्थ ही की जाती है, वास्तव में उनका परस्पर कोई भेद नहीं हे