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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

वासवाजौ तनुत्यागी वृत्रो विततमानसः । अन्तःशान्तमना मानी चकार सुरसंगरम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त और अहंकार की एकता की उक्ति का फल कहते है । भद्र श्रीरामचन्द्रजी, जैसे पट का विनाश होने पर पट (वस्त्र) और शुक्लत्व दोनों का विनाश हो जाता है, वैसे ही मन ओर अहंकार इन दोनों के बीच में से किसी एक का विनाश हो जाने पर मन एवं अहंकार दोनों का विनाश हो ही जाता हे