Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 71
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हिन्दी अर्थ
आन्तर आसक्ति के त्याग से देहदुःख आदि की भी प्रसक्ति नहीं होती, ऐसा कहते हैं।
शरीर से पृथक् यानी भिन्न आत्मा का अपरोक्ष साक्षात्कार कर रहे नित्यानित्य विवेक के विज्ञान
सम्पन्न ज्ञानी के भले ही अंग काटे जायें, तथापि उसका कुछ भी काटा नहीं जाता