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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 72

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 72

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

देह से अतिरिक्त आत्मा का विस्मरण होने पर तो फिर दुःख होगा ? इस आशंका पर कहते हैं। जैसे एक बार प्रिय बन्धु का परिज्ञान हो जाने के अनन्तर फिर वह अज्ञात नहीं हो जाता, वैसे ही विमल प्रकाशस्वरूप जो आत्मा है, उसका कभी यदि ज्ञान हो गया, तो वह सदा ज्ञात ही रहता है, फिर उसका विस्मरण नहीं होता