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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 73

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 73

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

विस्मरण की अप्राप्ति मे दृष्टान्त ओर उपपत्ति से युक्त हेतु बतलाते हैं। जैसे पर्वत के तट से छू रही वर्षाकालीन नदी वर्षा की निवृत्ति हो जाने पर फिर नहीं छूती, वैसे ही सर्पभ्रान्ति की निवृत्ति हो जाने पर रज्जु मेँ फिर सर्पभावना नहीं होती