Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 74
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 74 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 74
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
निष्कर्ष यह निकला कि आत्म भ्रान्ति की निवृति हो जाने पर आत्मा का विस्मरण फिर नहीं होता ।
जैसे अग्नि के ताप से जिसके अंग विशुद्ध हो चुके हैं तथा जो निःशेषरूप से अपने स्वभाव को
यानी केवल सुवर्णस्वरूपता को प्राप्त हुआ है, ऐसा कीचड़ मेँ निमग्न हो रहा सुवर्ण भी फिर मल को
ग्रहण नहीं करता, वैसे ही प्रकृत में भी समझना चाहिए