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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 75

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 75

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, अपने हृदय की ग्रन्थि का उच्छेद हो जाने पर फिर देहादि के गुणों से आत्मा का बन्धन नहीं होता, क्या वृक्षस्थ वृन्त से यानी डंठली से टूट गये फल को कोई भी समर्थ पुरुष पुनः डंठल के साथ पूर्ववत्‌ जोड सकता है ? अर्थात्‌ नहीं जोड सकता