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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 76

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 76 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 76

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

पत्थर का छेदन और मणि के तात्त्विक स्वरूप का विचार इन दोनों की सहायता से जो मणि का अंश नहीं है, उस अंश को काटकर पत्थर के अन्तर्गत मणि की प्राप्ति की जाती है । इस प्रकार प्राप्त हुई मणि का पुनः पूर्ववत्‌ पाषाण के साथ सन्धान करने के लिए कौन पुरुष सामर्थ्य रख सकता है अर्थात्‌ कोई नहीं रख सकता