Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 77
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 77 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 77
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हिन्दी अर्थ
अविद्या का असली स्वरूप जान
लेने के अनन्तर कौन बुद्धिमान् पुरुष फिर उसमें डूबता है यानी फँसता है ? चाण्डालो के उत्सव
विशेष का परिज्ञान हो जाने के अनन्तर कौन द्विजन्मा उस उत्सव में संमिलित होने की प्रतीक्षा
करेगा ?