Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 78
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 78 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 78
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हिन्दी अर्थ
जैसे विशुद्ध सलिल मे हुई दुग्घ भ्रान्ति दुग्ध स्वरूप का विचार करने के अनन्तर
विनिवृत्त हो जाती है, वैसे ही संसारिक वासना बुद्धिस्थ आत्मा का स्वरूप का विचार करने के अनन्तर
विनिवृत्त हो जाती है