Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 84
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 75, verse 84 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 84
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, इस प्रकार विशुद्ध
परब्रह्मतत्त्व में उत्तम विश्रान्ति को प्राप्त हुआ धीर तत्त्वज्ञ पुरुष इन्द्र के साथ हजारों देवताओं से भी
विचलित नहीं किया जा सकता