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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 45

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 76, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 45

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, विवेक ओर अविवेक से मुक्ति सुलभ ओर असुलभ हो जाती है, इसलिए आप मनोविनाश को प्राप्त कर विवेक का प्रदीपन कीजिए