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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

यथा जलपरिस्पन्दाद्व्यतिरिक्त इवाम्भसः । दृश्यते वर्तुलावर्तश्चित्तस्पन्दात्तथा जगत् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज वसिष्ठ ने कहा : हे महाबाहो, अनेक बार मैंने आपसे जीवन्मुक्त के लक्षण कहे हैं, फिर भी मै जो यह संग्रहकर आपसे पुनः कह रहा हूँ, उसे सुनिये