Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अभ्यासादूर्ध्वरन्ध्रेण तालूर्ध्वं द्वादशान्तगे ।
प्राणे गलितसंवृत्ते प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
सन्निहित भी दुःखावस्था की उपेक्षा नहीं करता ओर न
सुखावस्था की अपेक्षा ही करता हे । कार्यो के सफल होने पर न हर्ष करता है और न कार्यो के विनष्ट
होने पर खिन्न होता है