Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
भ्रूमध्ये तारकालोकशान्तावन्तमुपागते ।
चेतने केतने बुद्धे प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि सूर्य शीतल प्रकाशवाला हो जाय चन्द्रमा का मण्डल तपने लग
जाय, अग्नि की ज्वाला नीचे की ओर हो जाय यानी अधोमुख होकर अग्नि जलने लगे, तो भी तत्त्वज्ञ
को आश्चर्यवुद्धि नहीं होती