Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
झटित्येव यदुद्भूतं ज्ञानं तस्मिन्दृढाश्रिते ।
असंश्लिष्टविकल्पांशे प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
क्यो आश्वर्य-बुद्धि नहीं होती ? तो इस पर कहते है।
चूँकि तत्त्ववेत्ता पुरुष यह जानता है कि परब्रह्म चिदात्मा की असीम ये मायाशक्तियाँ इस प्रकार
प्रस्फुरित हो रही हैं, इसलिए सैकड़ों आश्चर्यजनक घटनाओं के होने पर भी उसको आश्चर्य नहीं
होता