Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
येन प्रस्पन्दते चित्तं येन न स्पन्दते तथा ।
तद्ब्रह्मन्ब्रूहि मे येन चिकित्सेयं तदेव हि ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसने आत्मज्ञान प्राप्त
कर लिया है, ऐसा आत्मज्ञानी पुरुष कैवल्य को प्राप्त हुआ-सा चारों ओर प्रसुप्त मन से युक्त-सा
तथा घूर्णमान आनन्दवान्-सा अवस्थित रहता हे