Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 78, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
अभ्यासाद्दृढतां यातो वैराग्यपरिलाञ्छितः ।
यथावासनमायामः प्राणानां सफलः स्मृतः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
सुख, दुःख
दोनों के क्षीण हो जाने से हेय ओर उपादेय दोनों का भी विनाश तथा शुभ ओर अशुभ का विनाश हो
जाता हे, ऐसी स्थित में इष्ट ओर अनिष्ट कहाँ रहेंगे ?