Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अनाद्यन्तावभासात्मा परमात्मेह विद्यते ।
इत्येको निश्चयः स्फारः सम्यग्ज्ञानं विदुर्बुधाः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, जैसे जल के परितः स्पन्दन से (भ्रमण से) जल के पृथक् वर्तुल
(गोल) नामि आकार का आवर्त (र्भेवरा) दिखाई पडता है, वैसे ही चित्त के स्पन्दन से जगत् दीखाई
पडता है