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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

इमा घटपटाकाराः पदार्थशतपङ्क्तयः । आत्मैव नान्यदस्तीति निश्चयः सम्यगीक्षणम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे आकाश में सूर्यताप के संमुखनेत्रो के परिस्पन्दन से यानी ईक्षण से असत्‌ पिच्छाकार (मोर के पंख) ओर दूसरी ओर उनके स्पन्दन से असत्‌ मौक्तिक मण्डल सत्य-सा दिखाई पड़ता है, वैसे ही चित्त के स्पन्दन से असत्‌ जगत्‌ सत्य-सा दीखाई पड़ता है