Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 21
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हिन्दी अर्थ
उच्चस्वर से प्रणव का उच्चारण होने पर
प्रान्त में (अन्त्य में) जो शेष तुर्यमात्रा रूप शब्दतत्त्व अनुभूत होता है, उसका अनुसन्धान करने से बाह्य
विषयों के विज्ञान का (बहिर्मुख चित्तवृत्ति का) जब आत्यन्तिक उपराम हो जाता है, तब प्राणवायु का
स्पन्दन रुक जाता है