Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 22
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
अब रेचक और पूरक इन दो में से किसी एक के द्वारा श्वास और प्रश्वास का जब शिथिलीकरण हो
जाता है तब दीर्घकाल तक तथा अभिवर्धन सहित ध्यान का अभ्यास होता है, इससे भी प्राणस्पन्दन
का निरोध होता है, यह कहते हैं।
रेचक का दृढ़ अभ्यास करने से, विच्छिन्न मेघों की आकाशरूपता की नाई, विपुलीभूत प्राणवायु
की शून्यरूपता हो जाती है और उससे जब नासिका के छिद्रों को प्राणवायु का स्पर्श नहीं होता, तब
प्राणवायु का स्पन्दन रुक जाता है