Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
पूरक का दृढ़ अभ्यास होने पर, पर्वत के ऊपर मेघों की नाई,
शरीर के आभ्यन्तर विद्यमान हजारों नाड़ियों के भीतर प्राणवायु तब तक धीरे-धीरे बढ़ता जाता है,
जब तक वह सर्वत्र व्याप्त होकर निश्चल नहीं हो जाता, इस प्रकार प्राणसंचरण शान्त हो जाने पर
प्राणस्पन्दन रुक जाता है