Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 26
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हिन्दी अर्थ
समस्त विकारों से वर्जित अतएव किसी भी
नाम से शून्य सूक्ष्म आकाश में यानी हृदयाकाश में बाह्य ओर आंतर संवेदन वृत्तिमात्र के निर्विकल्प समाधि
से विलीन हो जाने पर प्राणवायु का स्पन्दन निरुद्ध हो जाता है