Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 29
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हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार खेचरी मुद्रा भी प्राण स्पन्दन के निरोध में हेतु है, यह कहते हैं।
चिरकाल तक निरोध करने पर चक्षु की कनीनिकाओं के आलोक का यानी चक्षुरिन्द्रिय का उपराम
हो जाने से तथा पूर्वोक्त रीति से कपाल कुहर में प्रवेश करने से जिह्ना के अग्रभाग के और प्राण के
द्वादशान्त में प्राप्त हो जाने पर जब संकेतात्मक भ्रूमध्य यानी अविमुक्तस्थानात्मक चिन्मात्रस्वरूप
परमेश्वर का आत्मस्वरूप से ज्ञान हो जाता है तब प्राण का स्पन्दन रुक जाता है