Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 79, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 30
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हिन्दी अर्थ
गुरु या ईश्वर के अनुग्रह से काकतालीय न्याय से झटिति ज्ञान के उद्बुद्ध हो जाने पर तत्क्षण ही
चित्तविकल्प के उपशम से प्राण का निरोध होता है, ऐसा कहते हैं।
ईश्वर या गुरु के अनुग्रह से झटिति उत्पन्न हुए आत्मज्ञान के दुढीभूत तथा समस्त विकल्पांशों से
विनिर्मुक्त हो जाने पर प्राण का स्पन्दन निरुद्ध हो जाता है