Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 27
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हिन्दी अर्थ
हे चित्त, भाग्यवश केवल आत्मा ओर अनात्मा के विवेकमात्र से तुम
प्रमत्त चित्तरूपी वेताल मेरे देहरूपी मन्दिर से ऐसे निकल गये हो जैसे गुफा से दुष्ट क्रूर भेडिया