Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 82, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अस्मात्क्रियाक्रमाद्धोरात्संसारभ्रमदायिनः ।
आधिव्याधिमयाकारात्कालेनोद्वेगमाययौ ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
मूर्खताप्रयुक्त मोहरूपी भ्रम के शान्त हो जाने पर हम
लोगों को चित्त का वैसा अनुभव नहीं होता, जैसे तेल या गन्ने को पेरने के यन्त्र के ऊपर आरोहण करने
से उत्पन्न परिभ्रमण के बाद आरोही को पर्वत में परिभ्रमण का अनुभव नहीं होता