Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 67
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हिन्दी अर्थ
समस्त जगत् की परमात्मा ने ही अपने स्वरूप में कल्पना की है, अतः कोई वस्तु अलभ्य न होने से
परमात्मा को जगत् में किसी प्रकार की इच्छा नहीं है, ऐसा कहते हैं।
अविद्याप्रयुक्त एक और अनेक के प्रकाशक समस्तस्वरूप आत्मा ने अपनी ही आत्मा के अन्दर
जगत् का निर्माण किया है, ऐसी स्थिति में सब कुछ प्राप्त होने से अन्तरात्मा किसकी इच्छा करेगा