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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

तत्रासाववसद्भूमौकोटरे संकटोदरे । पङ्कसंपीडितस्कन्धः पर्वतेषु शिला यथा ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

मोहरूपी तुषार से वर्जित, निर्मल विवेक प्रकाश से समन्वित तथा मनरूपी रजोगुण से शून्य अब हृदयाकाशरूप ब्रह्म शोभित हो रहा है