Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
घ्राणप्रान्तगताल्पाल्पसमालोके इवेक्षणे ।
अर्धकुड्मलितैः पद्मैः श्रियमाययतुः समाम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अब चित्तके प्रति भी वैसा उपदेश देते हैं।
हे तुच्छ चित्त, तुम्हारी अपनी सत्ता केवल तुम्हारे दुःख के लिए ही स्पष्टरूपता को उस प्रकार
प्राप्त होती है, जिस प्रकार जलते समय तप्त कांचन की नाई प्रज्वलित होकर शब्द करनेवाली अभिमें
की गई क्रीडा बालक ओर पक्षियों के पार्श्वभाग के दाह के लिए होती है