Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
समकायशिरोग्रीवस्थानकः स महामतिः ।
आसीच्छैलादिवोत्कीर्णश्चित्रार्पित इवाथवा ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त ओर इन्द्रिय समुदाय की सत्ता से हुई अनर्थ- परम्परा को दिखलाते हैँ ।
हे चित्त, तुम देखो कि तुम्हारा अस्तित्व होने पर भ्रमणशील मूर्खो के राग, द्वेषादि तरंगों से व्याप्त
संसारूपी नदियों का समूह कालरूपी विशाल समुद्र मेँ प्रविष्ट हो रहा है