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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

तथाभितिष्ठतस्तस्य संवत्सरशतत्रयम् । कोटरे विन्ध्यकच्छस्य ययावर्धमुहूर्तवत् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

देखिए, परस्पर एक दूसरों के अहंकारो से होनेवाले एक दूसरों के वध, पराजय, उत्पीड़न आदि की चिन्ताओं से युक्त दुःख की पंक्तियाँ कहीं से उस प्रकार गिर रहीं हे, जिस प्रकार महावृष्टि की धाराएँ गिर रही हों