Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
एतावन्तमसौ कालं नाबुद्ध्यत किलात्मवान् ।
जीवन्मुक्ततया ध्यानी न च तत्याज तां तनुम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
असीम,
हृदय का उन्मूलन करने में उद्यत, भीषण क्रन्दन करानेवाली तथा क्रूर संपत्ति-विपत्तिरूपी महामारी
चारों ओर से प्रस्फुरित हो रही है