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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

तावत्कालं स सुभगो न प्राबुध्यत योगवित् । उदारैरम्बुदारावैरासारभरघर्घरैः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस शरीररूपी जर्जर वृक्ष के ऊपर निर्मल तथा प्रकाशमान जरा-मरणरूपी मंजरी विकसित हो रही है, जिसमें कास-श्वास (खाँसी) रूपी गूँज रहे भ्रमर विद्यमान हैं