Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 85, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
रविं वातमयी पूज्यं प्रणनामाशु चेतसा ।
भानुनाप्यभ्यनुज्ञातो मानपूर्वकमग्रगम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
उन्होनें जिसका अनुभव किया, उसे ही कहते है।
कमनीय केलास पर्वत के कानन में एक कदम्बवृक्ष के नीचे सौ वर्षो तक उन्होंने अपने हृदय में
मुनित्व का अनुभव किया जो जीवन्मुक्त आत्मा के कारण विमल था