Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 85, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
विवेश पिङ्गलाकारं विन्ध्यकन्दरगामिनम् ।
पिङ्गलोऽसौ नभस्त्यक्त्वा कुञ्जकुञ्जरसुन्दरम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
सौ वर्षो तक उन्होने
मानसी व्याधि से वर्जित विद्याधरत्व का अनुभव किया ओर पाँच युगो तक देवताओं एवं चारणों से
वन्दित देवराजत्व का अनुभव किया