Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 85, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
शार्वस्यास्य गणस्याभूत्प्राग्ज्योतिःस्मरणे स्वयम् ।
इच्छा कदाचित्सकलप्राग्जन्मालोकनोन्मुखी ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस महामुनि का क्रमश: प्राणसंचार भीतर हृदय में ही उस प्रकार शान्त हो गया, जिस
प्रकार इन्धन के जल जाने पर अग्नि में ज्वालाओं के समूह का संचरण शान्त हो जाता है