Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
ततोऽङ्ग संविदं स्वस्थां प्रतिभासमुपागताम् ।
सद्यो जातशिशुज्ञानसमानकलनामलम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
चलते-फिरते उठते-वैठते चित्त से शून्य हुए उस वीतहव्य मुनि के हृदय में
अपने मन के (बाधित-अनुवृत्त मन के) साथ विनाश के लिए इस प्रकार की कथा यानी वक्ष्यमाण
विचारात्मक कथा हुई