Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 35
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हिन्दी अर्थ
आश्चर्य है कि प्राणियों के स्वार्थो की अत्यन्त विषम गति हे, क्योकि वस्तु की प्राप्ति के
लिए घनिष्ठ मित्र आदि स्वजनों को भी छोडकर पुरुष दूर-दूर दौड़ जाते हैं | इसी न्याय के अनुसार
सैकड़ों जन्म तक साथी रहकर मैं भी आज अपने प्यारे मित्र शरीर से अलग हो रहा हूँ