Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 36

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे मित्र देह, चिरकाल से बन्धुरूप तुम मेरे द्वारा जो त्यागे जा रहे हो वह एक स्वार्थ की ही लीला हे । (यह मेरा अपराध नहीं है, किन्तु तुमने अपना ही नाश करने के लिए मेरा उपकार किया है, यों मानों शोक कर रहे कहते हैँ ।) हे देह, तुमने ही अपने लिए आत्मज्ञानवश उस प्रकार की क्षति उठा ली है