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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 88, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 22

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जो तत्त्व समस्त शास्त्र का सिद्धान्तभूत है, जो सबके हृदय में अनुगत है, जो सर्वात्मक है ओर जो सबका स्वरूप है, तत्स्वरूप होकर ये मुनि अवस्थित थे ॥ २ १॥ जो सर्वथा स्पन्दन क्रिया से रहित है, जो समस्त प्रकाशमान सूर्य आदि तेजो का भी भासक बनकर प्रकाशित हो रहा है तथा जो केवल अपने अनुभव के स्वरूपभूत है, तत्स्वरूप होकर ये मुनि विराजित थे